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मुग़ल वंश 

औरंगज़ेब (1658-1707 AD)

                                                           BIBI KA MAQBARA(AURANGABAD)

शाहजहां के बाद उसके  औरंगज़ेब मुग़ल साम्राज्य को हथिया लिया। 

औरंगज़ेब सर्वप्रथम 21, जुलाई 1658 को दिल्ली के सिंहासन पर बैठा। 


औरंगज़ेब का दूसरी बार राज्याभिषेक 1659 में हुआ। 


औरंगज़ेब आलमगीर के नाम से सिंहांसन पर बैठा।

औरंगज़ेब मुमताज़ महल का पुत्र था। 


सम्राट बनने के पश्चात औरंगज़ेब ने जनता केअर्थिक कष्टों के निवारण हेतु राहदारी (Rahdari)और पांनदारी (Pandari)नामक चुंगियों को समाप्त कर दिया। 


उसने उलेमा वर्ग की सलाह (Ruled according to Ulemas) के अनुसार इस्लामी ढंग से राज किया। 


औरंगज़ेब ने प्रथम युद्ध जुझार सिंह (First war was against Jujhar Singh) के विरुद्ध लड़ा था। 


औरंगज़ेब ने असम जितने का कार्य मीर जुमला (Mir Jumla) को सौंपा था। 


पुरन्दर की संधि 1665AD में  शिवाजी एवं जयसिंघ  के बीच हुई थी। 


मदन्ना और अकन्ना (Madanna and Akanna) गोलकुंडा के शासक अबुल हसन के मंत्री थे। 


शिवाजी को कैद कर जयपुर भवन (Shivaji was kept in Jaipur Bhavan Prision) में रखा गया था। 



औरंज़ेब के विरुद्ध मथुरा का जाट विद्रोह जाट नेता गोकुल के नेतृत्व में 1669 ईस्वी में हुआ। 


सिकंदरा स्थित अकबर के मकबरे को राजाराम ने लूटा(Rajaram looted Sikandera’s Makbara)। 


भरतपुर राजवंश की नींव चुरामन ने डाली। 


इस्लाम नहीं मानने पर सिखों के नौंवे गुरु तेगबहादुर की हत्या(Guru Teg Bahadur Singh)  औरंगज़ेब ने कराइ। 


पहल प्रणाली (Pahal System) को गुरु गोविन्द सिंह ने प्रारम्भ किया। 


नाम के अंत में सिंह(Singh Surname was started by Guru Govind Singh) शब्द का प्रयोग गुरु गोविन्द सिंह ने शुरू किया। 


गोविन्द सिंह ने  दसवें पादशाह का ग्रन्थ   का संकलन(Compiled by Guru Govind Singh) किया। 


औरंगज़ेब के समय हिन्दू मनसबदारो की संख्या (Strength of Hindu Mansabdars)लगभग 33 प्रतिशत थी। 

औरंगज़ेब की मृत्यु मार्च 1707AD में हुई। 


औरंगज़ेब को दौलताबाद स्थित फ़क़ीर बुरहानुद्दीन की कब्र के अहाते(Near to Faquir Burhanuddin)  में दफनाया गया। 


औरंगज़ेब ने अपने शासन का आधार कुरान (Administration was based on Quran)को बनाया।  


औरंगज़ेब ने जजिया कर 1679 AD(Reimposed Jaziya) में लगाया। 


बनरास के विश्वनाथ मंदिर(Vishwanath Temple) और मथुरा के केशवराय मंदिर (Keshavnath Temple) औरंगज़ेब ने तुड़वा (Destroyed) दिए। 


हिन्दुओं के त्योहारों को सार्वजनिक तौर(Banned Hindus to Celebrate their festival) पर मानाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया। 


औरंगज़ेब ने सिक्के पर कलमा खुदवाना, नौरोज़ का त्यौहार मनाना(Nauroz), भांग की खेती करना , नाच गाना , झरोखा दर्शन (Jharokha Darshan) एवं तुलादान पर प्रतिबन्ध भी लगवा दिया। 

औरंगज़ेब ने शरीयत के विरुद्ध लाये जाने वाले लगभग 80 करों को समाप्त कर(Removed taxes against Shariyat) दिया। 


औरंगज़ेब का मुख्य लक्ष्य दारुल हर्ब को दारुल इस्लाम (to convert Darul Herb to Darul Islam)में परिवर्तित करना था। 


अपने चारित्रिक गुणों के कारण औरंगज़ेब को ज़िंदा पीर (Zinda Pir) और दरवेश (Darvesh) के नाम से जाना जाता है।

 उसने सति प्रथा (Abandoned Sati)  पर भी प्रतिबन्ध लगवाया। 


1686 AD में औरंगज़ेब ने बीजापुर तथा 1687 AD में गोलकुंडा को जीतकर (Won Bijapur and Golkunda) मुग़ल साम्राज्य में मिला लिया। 


 क्षेत्रफल की  दृष्टि से औरंगज़ेब के समय मुग़ल साम्राज्य अपने चरमोत्कर्ष (Area wise this Mughal Period was on its peak in Aurangzeb reign) पर था।  यह काबुल से चटगांव तक और कश्मीर से लेकर कावेरी नदी तक विस्तृत था। 


औरंगज़ेब ने अपनी बेगम दिलरास बानो बेगम की मांग पर ताजमहल की प्रतिकृति का निर्माण किया जिसे बीबी का मकबरा (Bivi ka Makbara)या द्धितीय ताजमहल (Second Taj Mahal) के नाम से जाना जाता है जो की औरंगाबाद में स्थित है। 


1681 AD में जब वह मारवाड़ में व्यस्त था तब औरंगज़ेब के पुत्र अकबर ने विद्रोह कर दिया।

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Author: admin

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